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व्यक्ति को कैसे प्रभावित करता है कुंडली में बना कालसर्प दोष।

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वर्तमान समय में अक्सर देखा जाय तो   किसी भी ज्योतिषीय के द्वारा बताएगयेकुंडली में बने कालसर्प दोष का नाम सुनते ही व्यक्ति घबरा जाता है। कुंडली में कालसर्प दोष का पाया जाना कोई बहुत बड़ी घटना नहीं मानी जाती है। देखा जाता है कि 70 प्रतिशत लोगों की कुंडली में यह दोष होता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जी की कुंडली में भी यह दोष था और तो और क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की कुंडली भी कालसर्प दोष से प्रभावित थी लेकिन फिर भी दोनों व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्रों में नाम और मान-सम्मान प्राप्त करने में सफल रहे। कालसर्प दोष कुंडली में खराब जरूर माना जाता है किन्तु विधिवत तरह से यदि इसका उपाय किया जाए तो यही कालसर्प दोष सिद्ध योग भी बन सकता है। यह कालसर्प दोष किस प्रकार से व्यक्ति को प्रभावित करता है - जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतू ग्रहों के बीच अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। क्योकि कुंडली के एक घर में राहु   और दूसरे घर में केतु के बैठे होने से अन्य सभी ग्रहों से आ रहे फल रूक जाते हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच में सभी ग्...

जन्म पत्रिका के द्वादश भावो में राहु ग्रह का प्रभाव।

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भारतीय ज्योतिष के अनुसार राहु ग्रह को छाया ग्रह माना जाता है। राहु ग्रह व्यक्ति को अनुभ ही बल्कि व्यक्ति को शुभ फल से प्रभावित भी करता है आओ जानते हैं राहु के द्वादश भावों में शुभ - अशुभ फल को । - प्रथम भाव : दुष्ट बुद्धि , दुष्ट स्वभाव , सम्बन्धियों को ठगने वाला , मस्तक का रोगी , विवाद में विजय व रोगी होता हैं। द्वितीय भाव : कठोर कर्मी , धन नाशक , दरिद्र , भ्रमणशीला होता हैं। तृतीय भाव : शत्रुओं के ऐश्वर्य को नष्ट करने वाला , लोक में यशस्वी , कल्याण व ऐश्वर्य पाने वाला , सुख व विशाल को पाने वाला , भाईयों की मृत्यु करने वाला , पशु नाशक , दरिद्र , पराक्रमी होता हैं। चतुर्थ भाव : दुखी , पुत्र - मित्र सुख रहित , निरतंर भ्रमणशील व उदर रोगी बनाता हैं। पंचम भाव : सुखहीन , मित्रहीन , उदर - शुल रोगी , विलास में पीड़ा , भ्रमित व उदर रोगी बनाता हैं। षष्ठ भाव : शत्रु बल नाशक , द्रव्य लाभ पाने वाला , कमर में दर्द , म्लेच्छो से मित्रता व बलवान होता हेै। सप्तम भाव : स्त्री विरोधी , स्त्री नाशक , प्रचण्ड क्रोधी , स्त्री से विवाद करने वाला , रोगी स्त्री प्राप्त करता हैं...

जानिये व्यक्ति को कैसे डुबो देता है जन्मकुंडली में बना गुरु चांडाल योग

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भारतीय ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जन्मकुंडली में अनेकों शुभ-अशुभ योग निर्मित रूप से मानव जीवन पर सदैव अपने प्रभावों से जोड़े रखते हैं और समायानुसार मानवता की स्थितियों को प्रभावित करते रहते हैं |  बात करते है आज जन्मकुंडली बन रहे चांडाल योग की - जन्मकुंडली में चांडाल योग राहु और गुरु के युक्त या दृष्टि संबंध से बनता है   जिसे हम गुरु-चांडाल योग के नाम से पुकारते है। गुरुचांडाल योग गुरु ज्ञान , धर्म , सात्विक ता  का कारक है , तो दूसरी तरफ राहु सदैव व्यक्ति को भ्रम में डुबोये रखता है , व अनैतिक संबंध , अनैतिक कार्य , जुआ , सट्टा , नशाखोरी , अवैध व्यापार का कारक है। इन दो ग्रहों के युक्त प्रभाव से जातक की कुंडली में बन रहे गुरु चांडाल योग व्यक्ति को  प्रभावशील बनाये रखता है । राहु गुरु के प्रभाव को नष्ट करता है व उस जातक को अपने प्रभाव में जकड़ लेता है और ऐसा राहु हिंसक व्यवहार आदि प्रवृत्तियों को भी बढ़ावा देता है तथा अपने चरित्र पतन के बीज बो देता है और अपने चरित्र को भ्रष्ट कर देता है। गुरु चांडाल से जुड़ा हुआ व्यक्ति सदैव अनैतिकता तथा अवैध क्रिया- कलापों...