जानिये ज्योतिषशास्त्र के अनुसार क्यों आती है व्यवसाय में बाधायेँ ।



प्राचीन काल से चली आ रही रीति से व्यक्ति सदैव दो रास्तों पर चलता आ रहा है वह अपनी योग्यताओं और क्षमताओं के अनुसार अपनी आजीविका के साधन को चुनता रहता है कभी वह अपने खुद के व्यवसाय के पीछे दौड़ता है तो कभी वह नौकरी करने के लिए घर से दूर चला जाता है। परन्तु फिर भी मन में सोचता रहता है की काश  मेरा अपना काम यानि व्यवसाय होता तो आराम से अपनी आजीविका को घर बैठे चला लेता। धीरे-धीरे समाज में आगे बढ़ते हुए एक दिन वह बिना किसी के राय के सोचे समझे वह उत्साह पूर्वक अपना व्यवसाय प्रारम्भ कर लेता है। और अपने जीवन काल में अजीवाका चलाने के लिए आगे बढ्ने लगता है परन्तु इसके बावजूद भी कई बार उसे अपने अनुकूल या लाभदायक व्यवसाय में परिवर्तन करना पड़ता है। इसके कई कारण हैं परन्तु बात करते हैं ज्योतिष शास्त्र द्वारा व्यवसाय के बार-बार परिवर्तन के और उनसे जुड़ रही बाधाओं की।भारतीय ज्योतिषशास्त्र को एक प्रत्यक्ष शास्त्र माना गया है जो व्यक्ति के जन्म से पूर्व व मृत्यु के बाद
तक का जीवन काल को बताने में दृढ़ संकल्पित है। यदि कोई भी व्यक्ति ज्योतिषशास्त्र के द्वारा निर्मित अपनी जन्मकुंडली के अनुसार अपने व्यापार का चयन करता है तो वह जातक अपने जीवन के भौतिक सुखों से पूर्ण रहता है और बिना व्यवधान के अपने व्यवसाय को धीरे-धीरे अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ता रहता है। जन्मकुंडली में व्यवसाय को दर्शाने वाला भाव पंचम सप्तम भाव है नवम भाव भाग्य का प्रतिनिधित्व करता है और ग्यारहवां भाव हर प्रकार के लाभ का चाहे वह धन से हो या अपने व्यवसाय या पैतृक संपत्ति या अनेकों कार्य से जुड़े लाभ से। परन्तु जातक किन ग्रहों से संबंधित कार्य करेगा यह तय करना जन्मकुंडली के इन चार भावों से जुड़े राशि,ग्रह व व्यवसाय से जुड़े कारक ग्रह के द्वारा ही सम्भव है। यदि कोई भी अमीर या गरीब व्यक्ति बिना ज्योतिषीय परामर्श के द्वारा अपना मनचाह व्यवसास प्रारंभ करता है पर उस जातक की जन्मकुण्डली में व्यवसाय योग न होने के कारण उनके लिये फलदायी न हो तो वह कुछ समय के लिये फल तो दे सकता है पर ग्रहों की अशुभ चाल के अनुसार धीरे-धीरे व्यवसाय में बाधायें आने लगती है। तो किसी का व्यवसाय खुलने से ही पूर्व बन्द होने के आसार दिखने लग जाते हैं और आखिरकार व्यवसाय बन्द ही हो जाता है और जातक अपने सुखमय जीवन को अंधकार की ओर डूबता हुआ देखता है। यह सारा खेल जन्मकुंडली में बैठे ग्रहों के प्रभाव से होता है। यदि आप अपना व्यवसाय प्रारम्भ करना चाहते हो या अपना व्यवसाय कर रहें हो तो एक बार किसी अच्छे ज्योतिषीय से जुड़ कर अपने व्यवसाय की जानकारी अवश्य लें। इससे आपका जीवन काल सदैव सुखमय रहेगा व आपका व्यवसाय सदैव मंजिल की ओर बढ़ता रहेगा । 

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