जानिए जन्मकुंडली के साथ नवमांश कुंडली भी कैसे बताती है व्यक्ति के जीवन काल को ।




भारतीय अखंड ज्योतिष शास्त्र में जन्मकुंडली केवल लग्न कुंडली या चन्द्र कुंडली तक सीमित नहीं है| बल्कि षोडशवर्ग जिसे कि अधिकतर नजर अंदाज कर दिया जाता है जो की जन्मकुंडली और फलादेश करने के बहुमहत्वपूर्ण अंग हैं | यदि एक कुंडली को गहराई से देखा जाए तो एक दिन और एक महीना भी काफी नहीं है| अगर कोई ग्रह जन्म कुण्डली में नीच का हो एवं नवांश कुण्डली में उच्च को हो तो वह शुभ फल प्रदान करता है जो नवांश कुण्डली के महत्त्व को प्रदर्शित करता है। नवांश कुण्डली में नवग्रहो सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि के वर्गोत्तम होने पर व्यक्ति क्रमश: प्रतिष्ठावान, अच्छी स्मरण शक्ति, उत्त्साही, अत्यंत बुद्धिमान, धार्मिक एवं ज्ञानी, सौन्दर्यवान एवं स्वस्थ और लापरवाह होता है। भारतीय ज्योतिष में नवमांश कुण्डली अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। नवमांश कुण्डली को लग्न कुण्डली के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लग्न कुण्डली शरीर को एवं नवमांश कुण्डली आत्मा को निरुपित करती है। केवल जन्म कुण्डली से फलादेश करने
पर फलादेश समान्यत सही नहीं आता। पराशर संहिता के अनुसार जिस व्यक्ति की जन्म कुन्डली एवं नवांश कुण्डली में एक ही राशि होती है तो उसका वर्गोत्तम नवमांश होता है वह शारीरिक व आत्मिक रूप से स्वस्थ होता है। इसी प्रकार अन्य ग्रह भी वर्गोत्तम होने पर बली हो जाते है एवं अच्छा फल प्रदान करते है। षोडश वर्ग की श्रृंखला में सबसे पहले आता है नवमांश | जन्मकुंडली के नौवें अंश को नवमांश कहा जाता है | कहने को यह कुंडली का एक छोटा भाग है परन्तु आश्चर्य की बात है कि नवमांश से पत्नी या जीवन साथी के विषय में सही सही अनुमान लगाया जा सकता है | जीवन साथी का रंग रूप कैसा होगा , स्वभाव कैसा होगा, चरित्र और शिक्षा कैसी होगी, जीवन साथी की नौकरी या कारोबार की क्या स्थिति होगी यहाँ तक कि जीवन साथी किस व्यवसाय या पद से सम्बन्ध रखेगा,आर्थिक स्थिति क्या होगी , परिवार बड़ा होगा या छोटा | भाई बहनों के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है | यदि चरित्र में कोई दोष हो तो पता चल सकता है | विवाह से पहले कितने सम्बन्ध थे या हैं | विवाह के बाद का समय कैसा रहेगा | शादी सफल होगी या नहीं, आदि |किसी भी कुंडली का विशलेषण करते समय सबसे पहले लग्न और लग्नेश की स्थिति देखी जाती है | नवमांश लग्न यदि राहू केतु शनि या मंगल से युक्त हो तो पति या जीवन साथी कूर स्वभाव का होता है | स्त्री दुराचारिणी होती है | यदि केवल राहू का असर नवमांश लग्न पर हो तो जीवन साथी जो कुछ दिखाई देता है वैसा नहीं होता | आप आप भी अपनी जन्मकुंडली कुंडली में बैठे ग्रहों की सटीक निष्कर्ष चाहते है तो आप विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य इन्दु प्रकाश जी से संपर्क कर सकते हैं।



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